भारत में संक्रमितों की संख्या चीन से ज़्यादा हुई, क्या हैं इसके मायने?

वुहानवुहानवुहान

 

भारत में कोरोना संक्रमित रोगियों की संख्या चीन से भी ज़्यादा हो गई है.

शनिवार तक भारत में कोविड रोगियों की संख्या लगभग 86 हज़ार तक पहुँच गई है.

कोरोना महामारी की शुरूआत पिछले साल चीन से ही हुई थी मगर समझा जाता है कि चीन ने लॉकडाउन का सख़्ती से पालन कर स्थिति को नियंत्रण में कर लिया है.

हालाँकि चीन में महामारी के केंद्र वुहान शहर में हाल के दिनों में कुछ नए मामलों ने संक्रमण के दोबारा फैलने की भी चिंता बन गई है. इसे देखते हुए चीन ने पूरे वुहान के लोगों की जाँच करवाने की घोषणा की है.

भारत में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए 25 मार्च से ही पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया जिससे संक्रमण फैलने की गति पर लगाम लग सकी.

हाल के समय में अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर को देखते हुए उद्यमी, कारोबारी और कामगार तबके के साथ कई राजनेता भी लॉकडाउन को और नहीं बढ़ाने की अपील कर रहे हैं.

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अब तक लॉकडाउन दो बार बढ़ चुका है और मौजूदा लॉकडाउन की अवधि 17 मई को समाप्त हो रही है.

प्रधानमंत्री मोदी ने 12 मई को राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि लॉकडाउन फिर से बढ़ाया जाएगा मगर उन्होंने इसकी कोई अवधि या तारीख़ नहीं बताई.

उन्होंने ये कहा कि इस बार ये पहले के लॉकडाउन से बिल्कुल अलग होगा जिसमें नियम नए होंगे.

जहाँ तक कोरोना संक्रमण से हुई मौतों की बात है तो भारत में अभी तक स्थिति दूसरे कई देशों के मुक़ाबले बेहतर दिखाई दे रही है.

भारत में अब तक 2,752 लोगों की मौत हुई है, इसकी तुलना में चीन में 4,600 लोग मारे जा चुके हैं.

अमरीका और यूरोप के कई देशों में मृतकों की संख्या बहुत ज़्यादा है.

संक्रमण फैलने की दर को लेकर भी भारत सरकार काफ़ी संतुष्ट नज़र आ रही है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में अभी मामलों के दोगुना होने में 11 दिन लग रहे हैं जबकि लॉकडाउन शुरू होने से पहले इसमें 3.5 दिन लग रहे थे.

स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने हाल ही में कहा,”निश्चित रूप से लॉकडाउन से फ़ायदा हुआ है. हमने इस समय का इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाकर मामलों का पता लगाने, उनके संपर्क में आने वाले लोगों को खोजने, उन्हें एकांत में भेजने और संक्रमित मामलों की व्यवस्था में किया.”

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि मृत्यु दर नीचे रहने की वजह ये रही कि अधिकांश लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं थे या कम थे और लॉकडाउन पहले लगाने की वजह से एक बड़ी त्रासदी को टाला जा सका.

भारत में संक्रमण के कुल मामलों में से एक तिहाई मामले महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात और दिल्ली के हैं जो महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र भी हैं.

इस वजह से सरकार के लिए दोबारा सबकुछ खोलना चुनौती भरा हो सकता है क्योंकि इससे संक्रमण अचानक से बढ़ सकता है.

भारतीय प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की पूर्व सदस्य और ब्रूकिंग्स थिंकटैंक की विशेषज्ञ शमिका रवि ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा,”भारत में अभी भी मामले विकास के दौर में हैं क्योंकि कुल मामले अभी भी बढ़ रहे हैं. अभी ऐक्टिव मामले 3.8% की गति से बढ़ रहे हैं और देश में सब ठीक हो जाए इसके लिए ज़रूरी है कि ये दर घटकर 0% तक पहुँच जाए.”

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि चिंता का एक बड़ा विषय इतनी विशाल आबादी में जाँच की गति का धीमा रहना है.

हालाँकि देश में अप्रैल के आरंभ से काफ़ी प्रगति हुई है और इस सप्ताह एक लाख लोगों का टेस्ट हुआ. मगर एक अरब 30 करोड़ की आबादी के हिसाब से भारत दुनिया के दूसरे देशों जैसे अमरीका, ब्रिटेन और इटली से बहुत पीछे है.

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