COVID 19: विदेशों में फंसे भारतीयों के लिए मई से खुल सकता है वापसी का दरवाजा

 

 

विदेशों में स्थित भारतीय दूतावास इन दिनों उन लोगों की फेहरिस्त बनाने में जुटे हैं जो वापस लौटना चाहते हैं. सरकारी सूत्रों के मुताबिक इनमें प्राथमिकता छात्रों, कामगारों, भारतीय पर्यटकों और वीजा अवधि समाप्त होने के कारण लौटने वाले नागरिकों को दी जाएगी. इस कवायद में कोशिश की जा रही है कि लोगों को उनके गंतव्य के करीब से करीब पहुंचाया जा सके. भारत लौटने के इच्छुक सभी नागरिकों से दूतावासों के पास पंजीयन कराने और अपने पासपोर्ट और वीजा जानकारियां देने को कहा गया है.

 

सूत्रों के मुताबिक वापस लौटने को तैयार लोगों में एक बड़ी संख्या खाड़ी के मुल्कों में काम करने वाले मजदूरों की है. इनमें से कई मजदूरों के वर्क परमिट की अवधि समाप्त हो गई है तो कई ऐसे भी लोग हैं जो विभिन्न कारणों से जेल में थे और अब रिहा होने के बाद देश लौटने का इंतजार कर रहे हैं.

 

विदेशों में मौजूद भारतीय नागरिकों के वतन वापसी प्लान से जुड़े सूत्रों के मुताबिक यह काम चरणबद्ध तरीके से होगा. मई  को खत्म हो रही मौजूदा लॉक डाउन अवधि के खत्म होने से पहले सरकार में शीर्ष स्तर से आने वाले दिशा निर्देश तय करेंगे कि प्रस्तावित योजना कब और कैसे लागू होगी. हालांकि इस बात के संकेत हैं कि 18 मई से लोगों के लिए आवाजाही की रियायत का दरवाजा खुल सकता है. विदेशों से लोगों की वापसी से पहले देश के भीतर भी आवाजाही को नियंत्रित तरीके से खोला जाना है. साथ ही पर्याप्त संख्या में क्वारंटीन सुविधा भी सुनिश्चत की जानी है.

 

इस बीच सूत्रों के अनुसार अब तक के सबसे बड़े वतन वापसी प्लान में 500 विमानों के बेड़े के साथ साथ नौसेना के पोत और वायुसेना के हवाई जहाजों का भी इस्तेमाल संभव है. हालांकि सूत्रों के अनुसार अभी तक तैयारी इस अनुसार की जा रही है कि गैर नियमित कमर्शियल उड़ानों के जरिए लोगों को वापस लाया जाए. वहीं विमानों में भी सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए वापसी भी विचाराधीन है.

सूत्रों के मुताबिक वापस लौटने वाले लोगों को 14 दिन के क्वारंटीन में रहना होगा. इसके लिए सरकार द्वारा चिह्नित क्वारंटीन फेसेलिटी से लेकर घरों में ही क्वारंटीन अवधि पूरी करना शामिल है. इसके अलावा आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप भी वतन वापसी प्लान में सुरक्षा का अहम हथियार है. इसके जरिए हर व्यक्ति के क्वारंटीन की निगरानी मुकम्मल की जाएगी.

 

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अबु धाबी स्थित भारतीय दूतावास और भारतीय महावाणिज्यदूतावास ने बुधवार रात ई-रजिस्ट्रेशन की शुरुआत की थी। भारत लौटने की इच्छा रखने वाले नागरिकों का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। महावाणिज्यदूत ने बताया कि आवेदक भारत के अलग-अलग राज्यों से हैं, लेकिन 50 फीसदी केवल केरल से हैं। यूएई में मौजूद 34 लाख भारतीयों में से 10 लाख से अधिक केवल केरल से हैं।

इन कवायदों से जुटे सरकारी सूत्रों के मुताबिक हवाई अड्डे और बंदरगाहों पर ही विदेशों से लौटने वाले लोगों की मेडिकल स्क्रीनिंग और टेस्टिंग होगी. साथ ही उन्हें जरूरत के आधार पर क्वारंटीन सुविधा में भेजा जाएगा.कोरोना वायरस महामारी के बीच विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए मोदी सरकार महा-अभियान की शुरुआत करने जा रही है। इसके लिए भारतीय दूतावासों ने ई-रजिस्ट्रेशन की शुरुआत कर दी है। केवल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में 1 लाख 50 हजार से अधिक भारतीयों ने घर वापस आने के लिए अपना नाम रजिस्टर किया है।दुबई में भारत के महावाणिज्यदूत विपुल ने गल्फ न्यूज को बताया, ”शनिवार शाम 6 बजे तक हमें 1 लाख 50 हजार से अधिक रजिस्ट्रेशन प्राप्त हुए हैं।” उन्होंने कहा कि इनमें से एक तिहाई बेरोजगार हो चुके हैं और इसलिए घर वापस जाना चाहते हैं।”

 

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