रक्षा मंत्रालय ने एमईएस में 9300 सिविल पदों को किया खत्म

 

rajnath singh

नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय ने मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज़ (एमईएस) के करीब 9300 पदों को खत्म कर दिया है. माना जा रहा है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण रक्षा बजट पर असर पड़ सकता है. ऐसे में रक्षा मंत्रालय ने गैर-जरूरी पदों को खत्म करना शुरू कर दिया है.

 

रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एमईएस में 9304 पदों को खत्म करने की मंजूरू दे दी है. ये सभी पद बेसिक और इंडस्ट्रियल वर्कफोर्स का हिस्सा हैं, जो अमूमन सिविलयन स्टाफ (असैन्य पद) के लिए होते हैं.

 

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ये कदम शेकतकर कमेटी के सुझावों के अनुरूप लिया गया है, जिसके तहत सेनाओं की युद्धक-क्षमता को बढ़ाने और रक्षा-बजट को सही तरीके से खर्च करने पर जोर दिया गया था.

 

आपको बता दें कि शेकतकर कमेटी ने करीब दो साल पहले अपनी रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय कौ सौंप दी थी, लेकिन हाल ही में जब पहले चरण के लॉकडाउन के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीडीएस और तीनों सेना (थलसेना, वायुसेना और नौसेना) प्रमुखों के साथ जो पहली मीटिंग मंत्रालय में की थी, उसमें शेकतकर कमेटी के सुझावों पर ही खास चर्चा की थी. उसके बाद तीनों सेनाओं के वरिष्ठ सैन्य कमांडर्स के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी गैर-जरूरी खर्चों को कम करने पर जोर दिया था.

 

साफ है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते देश की अर्थव्यवस्था पर खासा असर पड़ने वाला है, जिसका असर रक्षा बजट पर भी पड़ सकता है. इसीलिए रक्षा बजट को प्रभावी तरीके से उपयोग के लिए ही गैर-जरूरी पदों को खत्म किया जा रहा है. क्योंकि रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा सिविलयन-स्टाफ की सैलरी और पेंशन पर खर्च हो जाता है.

 

शेकतकर कमेटी ने एमईएस में सिविलयन स्टाफ को हटाकर उनके काम को आउटसोर्स करने का सुझाव दिया था. खुद एमईएस के इंजीनियर इन चीफ (प्रमुख) ने भी बेसिक एंड इंडस्ट्रलियल विभाग के 13,157 पदों में से 9304 को खत्म करने का प्रस्ताव दिया था.

 

एमईएस यानी मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस में ‌सैन्य-इंजीनियर और सैनिकों के साथ-साथ सिविल स्टाफ भी कार्यरत होता है. एमईएस का मुख्य चार्टर तीनों सेनाओं के लिए छावनी, मिलिट्री स्टेशन, एयरबेस और रिहायशी मकान इत्यादि बनाना और उनका रखरखाव करना है.

 

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस सिफारिश का उद्देश्य एमईएस को एक प्रभावी और कुशल विभाग बनाना है, जो कम बजट को प्रभावी तरीके से उभरते परिदृश्य में संभालने के लिए तैयार रहे.

 

एमईएस की भूमिका: 
मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज भारतीय सेना की प्रमुख निर्माण कंपनी है। यह भारत में सबसे बड़ी निर्माण और मेंटिनेंस एजेंसियों में से एक है, जिसका कुल वार्षिक बजट लगभग 13,000 करोड़ रुपये है। यह मुख्य रूप से भारतीय सेनाओं, आयुर्विज्ञान कारखानों, डीआरडीओ और भारतीय तट रक्षक सहित भारतीय सशस्त्र बलों के लिए इंजीनियरिंग और निर्माण कार्यों का प्रबन्धन करती है। MES के पूरे भारत में छह सौ से अधिक स्टेशन हैं।

 

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